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कुंडली में विवाह योग — समय, जीवनसाथी और मांगलिक

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जन्म विवरण डालें और यह टूल कुंडली के वे हिस्से पढ़ता है जो ज्योतिषी विवाह के लिए देखते हैं: सप्तम भाव और उसका स्वामी, शुक्र और गुरु, नवांश (D9), दारकारक और उपपद, मांगलिक और उसके हर अपवाद, और वे समय जब दशा और गुरु-शनि का गोचर आपके सप्तम भाव पर एक साथ आते हैं।

यह गणना दिखाता है, फ़ैसला नहीं। आपकी कोई जानकारी सहेजी नहीं जाती।

समय के बिना चंद्र राशि को पहला भाव माना जाता है, और नवांश लग्न नहीं निकलता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुंडली बता सकती है कि शादी कब होगी?

कुंडली वे समय दिखाती है जिन्हें परंपरा विवाह से जोड़ती है: सप्तमेश, शुक्र और संबंधित ग्रहों की दशा, ख़ासकर जब गुरु और शनि दोनों सप्तम भाव पर हों। ये संभावित समय हैं, तारीख़ नहीं; बाक़ी लोग तय करते हैं।

क्या जन्म समय ज़रूरी है?

लग्न, भाव और नवांश के लिए हाँ। उसके बिना यह टूल चंद्र राशि को पहला भाव मानता है, जो परंपरा का विकल्प है, और यह बताता भी है।

दारकारक क्या है?

जैमिनी ज्योतिष में सात ग्रहों में जिसका अपनी राशि में अंश सबसे कम हो। इसे जीवनसाथी का कारक माना जाता है।

क्या मांगलिक दोष हमेशा समस्या है?

नहीं। कई मांगलिक कुंडलियों में कोई शास्त्रीय अपवाद लागू होता है, जिसे यह टूल बताता है, और दो मांगलिक कुंडलियाँ परंपरा से एक-दूसरे का दोष काटती मानी जाती हैं।

क्या मेरी जानकारी सहेजी जाती है?

नहीं। कुंडली की गणना होती है, परिणाम दिखता है, और जानकारी भुला दी जाती है।

हर हिस्से के नियम विवाह ज्योतिष गाइड में पढ़ें, या अपनी पूरी जन्म कुंडली बनाएँ।