मुखपृष्ठ›विवाह की रस्में›मंगल फेरे
विवाह के दिनमंगल फेरे: अग्नि के चारों ओर फेरों का अर्थ
मंगल फेरे विवाह की वह मुख्य रस्म है जिसमें दूल्हा और दुल्हन पवित्र अग्नि के चारों ओर एक साथ चक्कर लगाते हैं। बहुत से हिंदू परिवारों में फेरों के पूरे होने के बाद ही विवाह को संपन्न माना जाता है।
मंगल फेरे क्या हैं
मंडप के बीच में एक हवन कुंड होता है, जिसमें पंडित जी अग्नि प्रज्वलित करते हैं। दूल्हा और दुल्हन का गठबंधन किया जाता है, यानी दुल्हन की चुनरी या पल्लू का एक सिरा दूल्हे के दुपट्टे या पटके से बाँध दिया जाता है। फिर दोनों अग्नि के चारों ओर फेरे लेते हैं, और हर फेरे के साथ पंडित जी मंत्र पढ़ते हैं।
उत्तर भारत के ज़्यादातर परिवारों में सात फेरे लिए जाते हैं, इसलिए "सात फेरे" शब्द शादी का ही पर्याय बन गया है। कुछ परंपराओं में फेरों की संख्या अलग होती है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है।
अर्थ और प्रतीक
अग्नि को साक्षी मानना इस रस्म का मूल है। परंपरा में माना जाता है कि अग्नि पवित्र है और उसके सामने दिए गए वचन सबसे पक्के होते हैं। इसलिए विवाह को "अग्नि के साक्षी में" हुआ बंधन कहा जाता है।
गठबंधन यह दिखाता है कि अब दोनों का जीवन एक-दूसरे से जुड़ गया है। साथ में चलना यह संकेत है कि जीवन की यात्रा अब दोनों मिलकर तय करेंगे। फेरों में कभी दुल्हन आगे चलती है और कभी दूल्हा, और इसका भाव यह माना जाता है कि जीवन में कभी एक को आगे बढ़कर राह दिखानी होगी, कभी दूसरे को।
फेरों से पहले या उनके बीच "लाजा होम" जैसी रस्म भी होती है, जिसमें दुल्हन का भाई उसके हाथों में खील या लावा देता है और वह उसे अग्नि में अर्पित करती है। यह भाई के आशीर्वाद और घर की समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
कौन क्या करता है
- पंडित जी अग्नि प्रज्वलित करते हैं, मंत्र पढ़ते हैं और फेरों का क्रम बताते हैं।
- दूल्हा और दुल्हन गठबंधन के साथ अग्नि की परिक्रमा करते हैं।
- दुल्हन का भाई लाजा होम में खील देता है।
- दोनों परिवार के बड़े पास बैठकर फूल और अक्षत बरसाते हैं।
- फेरों के बाद दोनों बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
कब होते हैं
मंगल फेरे कन्यादान के बाद होते हैं। कई परंपराओं में फेरों के साथ या उनके बाद सप्तपदी और सात वचन होते हैं, जिनमें जीवन भर के वादे दोहराए जाते हैं। फेरों का समय आम तौर पर विवाह मुहूर्त के अनुसार तय किया जाता है, और कई परिवार उससे पहले कुंडली मिलान भी करवाते हैं।
क्षेत्रीय अंतर
- उत्तर भारत में आम तौर पर सात फेरे होते हैं। कुछ फेरों में दुल्हन आगे और बाकी में दूल्हा आगे चलता है, यह क्रम हर परिवार में अलग हो सकता है।
- गुजराती परिवारों में अक्सर चार "मंगल फेरे" होते हैं, जिन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जोड़ा जाता है। इसके बाद सप्तपदी होती है।
- सिख आनंद कारज में अग्नि के बजाय गुरु ग्रंथ साहिब के चारों ओर चार लावाँ होती हैं।
- दक्षिण भारत में फेरों से ज़्यादा महत्व सप्तपदी, यानी सात कदमों का होता है।
- बंगाल में भी अग्नि के चारों ओर फेरे और "सात पाक" जैसी रस्में होती हैं।
आज के परिवारों के लिए व्यावहारिक सुझाव
- दुल्हन के लहंगे और चुनरी को अग्नि से दूर रखें। सिंथेटिक कपड़े जल्दी आग पकड़ सकते हैं, इसलिए सावधानी ज़रूरी है।
- मंडप हवादार हो, ताकि धुएँ से किसी को परेशानी न हो।
- पंडित जी से पहले ही पूछ लें कि फेरों में कितना समय लगेगा, ताकि मेहमानों का भोजन और बाकी कार्यक्रम उसी हिसाब से रखें।
- दूल्हा-दुल्हन मंत्रों का अर्थ जानना चाहें, तो पंडित जी से छोटा-सा अनुवाद करते चलने का अनुरोध करें।
तारीख तय कर रहे हैं?
मुहूर्त कैलेंडर में हर महीने की शुभ विवाह तिथियाँ और उनके समय हैं।
विवाह मुहूर्त कुंडली मिलानQuestions people ask
शादी में सात फेरे ही क्यों होते हैं?
उत्तर भारत की परंपरा में सात फेरे और सात वचन जीवन के सात अहम पहलुओं से जोड़े जाते हैं। कुछ परंपराओं में चार फेरे भी होते हैं।
फेरों में आगे कौन चलता है?
यह परंपरा पर निर्भर है। आम तौर पर कुछ फेरों में दुल्हन आगे चलती है और बाकी में दूल्हा। पंडित जी इसका क्रम बताते हैं।
क्या फेरों के बिना हिंदू विवाह पूरा होता है?
कई हिंदू परंपराओं में सप्तपदी, यानी सात कदम, पूरे होने पर विवाह को संपन्न माना जाता है। अपनी परंपरा और क़ानूनी पहलुओं के बारे में जानकार से सलाह लेना बेहतर है।
गठबंधन क्या होता है?
गठबंधन में दुल्हन की चुनरी और दूल्हे के दुपट्टे को आपस में बाँधा जाता है। यह दोनों के जीवन के जुड़ने का प्रतीक माना जाता है।
मिलान के आँकड़े TrueSaath के निःशुल्क कैलकुलेटर द्वारा गणित पारंपरिक गुण मिलान हैं, और संदर्भ के लिए हैं, सलाह के रूप में नहीं।