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विवाह के दिन

सेहरा बंदी की रस्म: दूल्हे का सेहरा और उसका अर्थ

सेहरा बंदी वह रस्म है जिसमें बारात निकलने से पहले दूल्हे के सिर पर साफ़ा और उस पर फूलों या मोतियों की लड़ियों वाला सेहरा बाँधा जाता है। इसके बाद दूल्हा अपनी शादी के लिए पूरी तरह तैयार माना जाता है।

सेहरा बंदी क्या है

सेहरा फूलों, मोतियों, जरी या मनकों की लड़ियों से बना एक पर्दा जैसा होता है, जो दूल्हे की पगड़ी या साफ़े पर बाँधा जाता है और उसके चेहरे के सामने लटकता है। सेहरा बंदी की रस्म दूल्हे के घर पर होती है, जब वह बारात के लिए तैयार हो चुका होता है।

इस रस्म के साथ ही दूल्हे का रूप पूरा होता है। उत्तर भारत, ख़ासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मुस्लिम परिवारों में सेहरा बहुत पुरानी और प्रिय परंपरा है।

अर्थ और प्रतीक

परंपरा में माना जाता है कि सेहरा दूल्हे को बुरी नज़र से बचाता है। शादी के दिन दूल्हे पर सबकी नज़रें होती हैं, और चेहरे के सामने लटकती लड़ियाँ इस भावना से जुड़ी हैं कि उसका चेहरा सुरक्षित रहे।

सेहरा सम्मान और ख़ुशी का भी प्रतीक है। सेहरा बँधने के बाद दूल्हे को घर का "राजा" मानकर उसकी नज़र उतारी जाती है। कई परिवारों में सेहरे के बाद दूल्हे के सामने "सेहरा" नाम के ख़ास गीत गाए जाते हैं, जिनमें उसकी और उसके परिवार की तारीफ़ होती है।

कौन क्या करता है

  • दूल्हे की बहनें और भाभियाँ अक्सर सेहरा बाँधने में आगे रहती हैं।
  • कई परिवारों में पिता, चाचा या जीजा साफ़ा बाँधते हैं और फिर सेहरा लगाया जाता है।
  • बहनें सेहरा बाँधने के बदले शगुन माँगती हैं, जो एक प्यारी छेड़छाड़ होती है।
  • माँ या दादी दूल्हे की नज़र उतारती हैं और उसे आशीर्वाद देती हैं।
  • सिख परिवारों में कई बार गुरुद्वारे में या घर पर अरदास के बाद सेहरा बाँधा जाता है।

कब होती है

सेहरा बंदी शादी के दिन, बारात निकलने से ठीक पहले होती है। दुल्हन के घर पर उसी समय के आसपास चूड़ा और दूसरी तैयारियाँ चल रही होती हैं। सेहरा बँधते ही बारात निकलने की तैयारी शुरू हो जाती है। कई परिवार बारात निकलने का समय भी मुहूर्त के अनुसार तय करते हैं।

क्षेत्रीय अंतर

राजस्थान में दूल्हा रंगीन साफ़ा पहनता है और उस पर सेहरा या "सरपेच" लगाया जाता है। पंजाब में सेहरा अक्सर फूलों या मोतियों का होता है और इसके साथ कलगी भी लगती है। मुस्लिम परिवारों में फूलों का सेहरा बहुत आम है और इसके साथ सेहराबंदी के गीत गाए जाते हैं। बंगाल में दूल्हा "टोपोर" नाम का शोले से बना शंकु जैसा मुकुट पहनता है, जो अलग रूप में यही भूमिका निभाता है। दक्षिण भारत में सेहरा कम दिखता है, वहाँ दूल्हे के पारंपरिक परिधान और माथे की सजावट अलग होती है।

आज के परिवारों के लिए व्यावहारिक सुझाव

  • सेहरा और साफ़ा पहले से पहनकर देख लें। बहुत भारी सेहरा कई घंटों तक पहनना मुश्किल हो सकता है।
  • अगर बारात घोड़ी पर है, तो सेहरे की लड़ियाँ इतनी लंबी न हों कि दूल्हे को देखने में परेशानी हो।
  • असली फूलों का सेहरा शादी वाले दिन ही मँगवाएँ, ताकि वह ताज़ा रहे।
  • फ़ोटो के लिए कुछ देर सेहरा हटाकर भी तस्वीरें लें, ताकि दूल्हे का चेहरा दिख सके।
  • बहनों के शगुन का इंतज़ाम पहले से कर लें, ताकि रस्म में देरी न हो।

बाकी रस्मों के लिए विवाह की रस्में देखें।

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सेहरा कौन बाँधता है?

आम तौर पर दूल्हे की बहनें, भाभियाँ या घर के बड़े सेहरा बाँधते हैं। बहनें इसके बदले शगुन लेती हैं।

सेहरा क्यों पहना जाता है?

परंपरा में माना जाता है कि सेहरा दूल्हे को बुरी नज़र से बचाता है। यह दूल्हे के सम्मान और शादी की खुशी का भी प्रतीक है।

सेहरा किस चीज़ से बनता है?

सेहरा फूलों, मोतियों, जरी या मनकों की लड़ियों से बनता है। कई परिवार असली फूलों का सेहरा पसंद करते हैं।

क्या सेहरा फेरों के दौरान भी पहना जाता है?

कई परिवारों में दूल्हा मंडप तक सेहरा पहनता है और फेरों से पहले या बीच में उसे हटा दिया जाता है। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है।

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