मुखपृष्ठ›विवाह की रस्में›बारात

Read in English

विवाह के दिन

बारात की रस्म: दूल्हे का जुलूस, परंपरा और तैयारी

बारात दूल्हे और उसके परिवार-दोस्तों का वह जुलूस है जो नाचते-गाते दुल्हन के घर या शादी के स्थान तक पहुँचता है। यह शादी के दिन का सबसे उत्साह भरा पल माना जाता है।

बारात क्या है

बारात का मतलब है दूल्हे के साथ चलने वाले लोगों का समूह। दूल्हा आम तौर पर घोड़ी, हाथी, बग्घी या आजकल कार में बैठकर निकलता है, और उसके आगे-पीछे परिवार, रिश्तेदार और दोस्त ढोल, बैंड और नाच के साथ चलते हैं। बारात के लोगों को "बाराती" कहा जाता है।

पुराने समय में बारात कई बार दूर के गाँव तक जाती थी और कई दिन रुकती थी। आज ज़्यादातर बारातें कुछ घंटों की होती हैं, पर उनका उत्साह वैसा ही रहता है।

अर्थ और प्रतीक

बारात दूल्हे के परिवार की खुशी और उनके उत्साह का सार्वजनिक प्रदर्शन है। यह इस बात का भी संकेत है कि दूल्हा अकेला नहीं, पूरे परिवार और अपनों के साथ नए रिश्ते की ओर बढ़ रहा है।

घोड़ी पर बैठने को लेकर कई लोक-कहानियाँ प्रचलित हैं। परंपरा में माना जाता है कि घोड़ी पर सवार दूल्हा एक वीर की तरह अपनी दुल्हन को लेने जाता है। कई परिवारों में बारात निकलने से पहले दूल्हे की बहन घोड़ी को चने खिलाती है और उसकी बाग पकड़ने के बदले शगुन लेती है, इसे "वाग फड़ाई" या "घोड़ी चढ़ाई" कहा जाता है।

कौन क्या करता है

  • दूल्हा सेहरा बाँधकर घोड़ी या गाड़ी में बैठता है।
  • छोटा भतीजा या भांजा अक्सर "सरबाला" के रूप में दूल्हे के साथ बैठता है।
  • परिवार और दोस्त आगे नाचते हुए चलते हैं।
  • घर के बड़े बारात को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाते हैं और समय का ध्यान रखते हैं।
  • दुल्हन का परिवार बारात के स्वागत की तैयारी करता है, जिसमें आरती, तिलक और फूलों की बारिश शामिल हो सकती है।

कब होती है

बारात सेहरा बंदी के तुरंत बाद निकलती है और शादी के स्थान पर पहुँचकर रुकती है। वहाँ दोनों परिवारों की मिलनी होती है और फिर जयमाला की रस्म। कई परिवार बारात पहुँचने का समय शादी के मुहूर्त को ध्यान में रखकर तय करते हैं।

क्षेत्रीय अंतर

  • उत्तर भारत में घोड़ी, बैंड और ढोल वाली बारात सबसे आम है।
  • राजस्थान में कई जगह दूल्हा हाथी या ऊँट पर भी आता है, और साथ में पारंपरिक लोक-संगीत होता है।
  • सिख परिवारों में बारात अक्सर गुरुद्वारे की ओर जाती है, क्योंकि आनंद कारज वहीं होता है।
  • बंगाल में "बोरजात्री" यानी बाराती दुल्हन के घर जाते हैं, पर नाच-गाने वाली बड़ी बारात कम होती है।
  • दक्षिण भारत में दूल्हे का स्वागत अक्सर शादी के मंडप पर किया जाता है, और कई परिवारों में शादी से पहले की शाम "जानवासम" जैसा जुलूस होता है।

आज के परिवारों के लिए व्यावहारिक सुझाव

  • बारात का समय तय करें और उसका पालन करें। देर से पहुँचने पर बाकी रस्में और मेहमानों का खाना, सब पीछे खिसक जाता है।
  • सड़क पर आम लोगों और ट्रैफ़िक का ध्यान रखें। स्थानीय नियम और अनुमति पहले से देख लें।
  • पटाखों और तेज़ आवाज़ को लेकर ज़िम्मेदारी बरतें, बुज़ुर्गों, बच्चों और जानवरों पर इसका असर पड़ता है।
  • घोड़ी के साथ अनुभवी व्यक्ति रहे, ताकि कोई हादसा न हो।
  • बारातियों की संख्या दुल्हन के परिवार को पहले से बता दें, ताकि इंतज़ाम ठीक रहे।

सभी रस्मों का क्रम विवाह की रस्में पेज पर है।

तारीख तय कर रहे हैं?

मुहूर्त कैलेंडर में हर महीने की शुभ विवाह तिथियाँ और उनके समय हैं।

विवाह मुहूर्त कुंडली मिलान

Questions people ask

दूल्हा घोड़ी पर क्यों आता है?

यह एक पुरानी परंपरा है, जिसमें दूल्हे को वीर की तरह दुल्हन को लेने जाते दिखाया जाता है। आजकल कई दूल्हे कार, बग्घी या पैदल भी आते हैं।

सरबाला कौन होता है?

सरबाला दूल्हे का छोटा भतीजा, भांजा या कोई छोटा रिश्तेदार होता है, जो बारात और रस्मों में दूल्हे के साथ रहता है।

बारात का स्वागत कैसे किया जाता है?

दुल्हन का परिवार बारात का स्वागत आरती, तिलक, फूलों और मिठाई से करता है। इसके बाद दोनों परिवारों की मिलनी होती है।

बारात में कितना समय लगना चाहिए?

कोई तय नियम नहीं है, पर इसे इतना लंबा न रखें कि बाकी रस्में और खाना देर से हों। दोनों परिवार पहले से समय तय कर लें।

मिलान के आँकड़े TrueSaath के निःशुल्क कैलकुलेटर द्वारा गणित पारंपरिक गुण मिलान हैं, और संदर्भ के लिए हैं, सलाह के रूप में नहीं।