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विवाह के दिनसिंदूर दान की रस्म: मांग भरने का अर्थ और विधि
सिंदूर दान वह रस्म है जिसमें फेरों के बाद दूल्हा पहली बार दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है। उत्तर और पूर्व भारत के कई परिवारों में इसे विवाह की सबसे पहचानी जाने वाली रस्म माना जाता है।
सिंदूर दान क्या है
सिंदूर लाल या नारंगी-लाल रंग का चूर्ण है, जिसे विवाहित महिलाएँ अपनी मांग, यानी बालों के बीच की रेखा में लगाती हैं। सिंदूर दान की रस्म में दूल्हा एक सिक्के, अँगूठी, चाँदी की डिब्बी के ढक्कन या अपनी उँगली से दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है।
कई परिवारों में यह रस्म इस तरह होती है कि दुल्हन के सिर पर एक कपड़ा या चुनरी डाली जाती है, और दूल्हा माथे से लेकर बालों तक सिंदूर भरता है। कुछ परिवारों में यह एक बार होता है और कुछ में कई बार।
अर्थ और प्रतीक
परंपरा में माना जाता है कि सिंदूर विवाहित स्त्री के सुहाग का प्रतीक है और यह पति की लंबी उम्र और दांपत्य की खुशहाली की कामना से जुड़ा है। लाल रंग शक्ति, उत्साह और शुभता का रंग माना जाता है।
सिंदूर दान को कई परिवार उस पल के रूप में देखते हैं जब दुल्हन अब नवविवाहिता के रूप में पहचानी जाने लगती है। इसी कारण यह रस्म बहुत भावुक भी होती है, और दुल्हन की सहेलियाँ और परिवार इस पल पर खास ध्यान देते हैं।
आज बहुत सी महिलाएँ सिंदूर को अपनी पसंद से लगाती हैं। कोई इसे रोज़ लगाती है, कोई त्योहारों और ख़ास मौकों पर। यह फ़ैसला पूरी तरह उनका और उनके परिवार की समझ का है।
कौन क्या करता है
- दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है।
- पंडित जी मंत्र पढ़ते हैं और रस्म का सही समय बताते हैं।
- कई परिवारों में दूल्हे की बहन या भाभी सिंदूर की डिब्बी लेकर आती है।
- घर की बड़ी महिलाएँ पास रहकर आशीर्वाद देती हैं।
- अक्सर इसके बाद या साथ में मंगलसूत्र पहनाया जाता है।
कब होती है
सिंदूर दान आम तौर पर सप्तपदी और सात वचन के बाद होता है, जब फेरे पूरे हो जाते हैं। कुछ परिवारों में सिंदूर दान और मंगलसूत्र एक साथ होते हैं, और कुछ में मंगलसूत्र पहले पहनाया जाता है।
क्षेत्रीय अंतर
बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में सिंदूर दान बहुत अहम रस्म है। बंगाली विवाह में "सिंदूर दान" के दौरान दुल्हन के सिर पर "लज्जा बस्त्र" नाम का नया कपड़ा डाला जाता है। बिहार और झारखंड के कई परिवारों में दुल्हन के नाक से मांग तक लंबा सिंदूर लगाने की परंपरा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी यह रस्म आम है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में सिंदूर के साथ-साथ कुमकुम और मंगलसूत्र का महत्व ज़्यादा होता है, और कई परिवारों में मांग भरने की अलग रस्म नहीं होती। उत्तर भारत के पंजाबी परिवारों में भी सिंदूर लगाया जाता है, पर उसकी रस्म का रूप हर घर में अलग हो सकता है।
आज के परिवारों के लिए व्यावहारिक सुझाव
- सिंदूर की गुणवत्ता पर ध्यान दें। कुछ सस्ते सिंदूर में ऐसे रसायन हो सकते हैं जो त्वचा और बालों को नुकसान पहुँचाएँ। भरोसेमंद जगह से लें।
- अगर दुल्हन को एलर्जी है, तो पहले थोड़ा लगाकर देख लें।
- दुल्हन का मेकअप और हेयरस्टाइल बनाने वाले को बता दें कि मांग में सिंदूर भरा जाएगा, ताकि वह उसी हिसाब से तैयारी करे।
- सिंदूर गिरकर कपड़ों पर दाग छोड़ सकता है, इसलिए एक छोटा कपड़ा या रूमाल नीचे रखें।
- शादी के बाद सिंदूर कब और कितना लगाना है, यह दुल्हन की अपनी पसंद है। परिवार इसमें सहयोग करें, दबाव नहीं।
बाकी रस्मों का पूरा क्रम विवाह की रस्में पर है।
तारीख तय कर रहे हैं?
मुहूर्त कैलेंडर में हर महीने की शुभ विवाह तिथियाँ और उनके समय हैं।
विवाह मुहूर्त कुंडली मिलानQuestions people ask
सिंदूर दान कब होता है?
आम तौर पर फेरे और सात वचन पूरे होने के बाद। कुछ परिवारों में यह मंगलसूत्र के साथ होता है।
सिंदूर किस चीज़ से भरा जाता है?
दूल्हा आम तौर पर सिक्के, अँगूठी, सिंदूरदानी के ढक्कन या उँगली से सिंदूर भरता है। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है।
क्या शादी के बाद रोज़ सिंदूर लगाना ज़रूरी है?
यह हर महिला और परिवार की अपनी पसंद है। कई महिलाएँ रोज़ लगाती हैं और कई केवल ख़ास मौकों पर।
सिंदूर किस बात का प्रतीक है?
परंपरा में माना जाता है कि सिंदूर सुहाग और दांपत्य की खुशहाली का प्रतीक है। इसका लाल रंग शुभता और ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
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