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विवाह के बाद

मुँह दिखाई की रस्म: नई बहू का स्वागत और उपहार

मुँह दिखाई वह रस्म है जिसमें ससुराल पहुँचने के बाद नई बहू का घूँघट या चुनरी उठाकर उसका चेहरा देखा जाता है और उसे उपहार या शगुन दिया जाता है। यह नई बहू को परिवार में अपनाने की एक प्यारी परंपरा है।

मुँह दिखाई क्या है

मुँह दिखाई की रस्म आम तौर पर गृह प्रवेश के बाद ससुराल में होती है। दुल्हन एक जगह बैठती है, और परिवार की महिलाएँ, जैसे सास, दादी सास, चाची सास, ननदें और पड़ोस की बुज़ुर्ग महिलाएँ, बारी-बारी से आती हैं। हर कोई उसका घूँघट थोड़ा उठाकर चेहरा देखता है, उसे आशीर्वाद देता है और कोई उपहार या शगुन देता है।

पुराने समय में जब दुल्हन शादी के पूरे समय घूँघट में रहती थी, तब यह सचमुच पहली बार उसका चेहरा देखने का मौका होता था। आज ज़्यादातर परिवार दुल्हन को पहले से जानते हैं, पर रस्म का भाव, यानी स्वागत और अपनापन, अब भी बना हुआ है।

अर्थ और प्रतीक

परंपरा में माना जाता है कि नई बहू को पहली बार देखने पर उसे खाली हाथ नहीं देखना चाहिए, इसलिए हर कोई कुछ न कुछ उपहार देता है। यह उपहार इस बात का प्रतीक है कि परिवार उसे खुले दिल से अपना रहा है।

मुँह दिखाई में मिले उपहार, जैसे गहने, कपड़े या पैसे, दुल्हन के अपने माने जाते हैं। कई परिवारों में सास इस मौके पर अपना कोई पुराना पारिवारिक गहना बहू को देती है, जो पीढ़ियों का जुड़ाव दिखाता है।

कई परिवारों में दूल्हा भी इस रस्म के तहत दुल्हन को कोई निजी उपहार देता है, जिसे पति की ओर से पहला उपहार माना जाता है।

कौन क्या करता है

  • दुल्हन सजी-धजी एक जगह बैठती है, अक्सर किसी ननद या भाभी के साथ।
  • सास पहले आकर मुँह दिखाई करती है और उपहार देती है।
  • फिर घर की बाकी महिलाएँ और रिश्तेदार आते हैं।
  • कोई एक व्यक्ति दुल्हन को हर मेहमान का परिचय कराता है, ताकि वह रिश्ते समझ सके।
  • दुल्हन बड़ों के पैर छूकर या प्रणाम करके आशीर्वाद लेती है।

कब होती है

मुँह दिखाई गृह प्रवेश के बाद, आम तौर पर उसी दिन या अगले एक-दो दिनों में होती है। कई परिवार इसे रिसेप्शन के आसपास रखते हैं, ताकि बाहर से आए रिश्तेदार भी शामिल हो सकें। इसके कुछ दिनों बाद दुल्हन पग फेरा के लिए मायके जाती है।

क्षेत्रीय अंतर

उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मुँह दिखाई काफ़ी प्रचलित है और कई जगह यह बड़ी पारिवारिक बैठक की तरह होती है। पंजाबी परिवारों में इसके साथ नई बहू को "शगुन" देने की रस्में जुड़ी होती हैं। मुस्लिम परिवारों में भी "मुँह दिखाई" की परंपरा है, जिसमें दूल्हा और ससुराल वाले दुल्हन को उपहार देते हैं। बंगाल में "बोउ भात" के आसपास नई बहू को उपहार दिए जाते हैं। दक्षिण भारत में यह रस्म इसी रूप में कम दिखती है, पर नई बहू के स्वागत के अपने तरीके वहाँ भी हैं।

आज के परिवारों के लिए व्यावहारिक सुझाव

  • घूँघट रखना है या नहीं, इस पर दुल्हन की सहजता का ध्यान रखें। बहुत से परिवार अब सिर पर हल्की चुनरी तक ही इसे सीमित रखते हैं।
  • रस्म को लंबा न खींचें। नई बहू पहले ही थकी होती है, और घंटों बैठना कठिन हो सकता है।
  • दुल्हन की शक्ल, रंग या रूप पर कोई टिप्पणी न करें। यह रस्म स्वागत की है, परखने की नहीं।
  • उपहारों की सूची बना लें, ताकि बाद में धन्यवाद देना और याद रखना आसान हो।
  • बच्चों और युवा रिश्तेदारों को भी शामिल करें, इससे माहौल हल्का और खुशनुमा रहता है।

तारीख तय कर रहे हैं?

मुहूर्त कैलेंडर में हर महीने की शुभ विवाह तिथियाँ और उनके समय हैं।

विवाह मुहूर्त कुंडली मिलान

Questions people ask

मुँह दिखाई में क्या उपहार दिया जाता है?

आम तौर पर गहने, साड़ी, कपड़े या शगुन के पैसे। यह परिवार की परंपरा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार होता है।

मुँह दिखाई के उपहार किसके होते हैं?

परंपरा में मुँह दिखाई के उपहार दुल्हन के अपने माने जाते हैं।

क्या दूल्हा भी मुँह दिखाई देता है?

कई परिवारों में दूल्हा भी दुल्हन को एक निजी उपहार देता है, जिसे पति की ओर से पहला उपहार माना जाता है।

मुँह दिखाई कब होती है?

आम तौर पर गृह प्रवेश के बाद, उसी दिन या अगले एक-दो दिनों में। कई परिवार इसे रिसेप्शन के आसपास रखते हैं।

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